भगवान राम की तपोभूमि में उमड़ा शिवभक्तों का सैलाब

धर्म नगरी चित्रकूट में मन्दाकिनी नदी के रामघाट तट पर स्थित सृष्टि के प्रथम शिवलिंग स्वामी मत्यगेंद्रनाथ के जलाभिषेक और पूजन के लिए सावन के पहले सोमवार पर देश भर से लाखों शिव भक्तों का जमावड़ा लगा हुआ है। सुबह से ही श्रद्धालु पतित पावनी मंदाकिनी में आस्था की डुबकी लगा कर लम्बी लम्बी कतारों में खड़े होकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक और पूजन कर रहे हैं। मंदिर और जिला प्रशासन चित्रकूट आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने में जुटा हुआ है।
भगवान श्री राम की तपोभूमि चित्रकूट में मन्दाकिनी नदी के रामघाट तट पर स्थित स्वामी मत्तगजेंद्र नाथ मन्दिर का प्राचीन और गौरवशाली इतिहास है। मंदिर के प्रधान पुजारी बिपिन तिवारी इस प्राचीन शिव मंदिर की महिमा का बखान करते हुए कहते हैं कि मान्यता है कि इस मंदिर में विराजमान चार शिवलिंग में से एक शिवलिंग भगवान ब्रम्हा और एक भगवान श्री राम ने स्थापित किया था।
ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना के लिए रामघाट स्थित यज्ञदेवी अखाड़ा में यज्ञ किया था। 108 कुंडीय यज्ञ से मदमस्त हाथी की तरह झूमता हुआ एक शिवलिंग प्रकट हुआ था, जिसकी स्थापना भगवान ब्रम्हा ने मत्तगजेंद्र नाथ के रूप में रामघाट में की थी और उनको चित्रकूट का क्षेत्रपाल नियुक्त किया था। इसीलिए जब भगवान श्री राम यहां पर वनवास काटने आए तो उन्होंने चित्रकूट निवास के लिए स्वामी मत्यगेंद्रनाथ से आज्ञा ली थी। इसके बाद श्रीराम ने खुद उस शिवलिंग के बगल में एक शिवलिंग की स्थापना की थी। ऐसी मान्यता है कि चित्रकूट आने पर यदि किसी ने मत्तगजेंद्र नाथ के दर्शन नहीं किए तो उसको कामतानाथ के दर्शन और कामदगिरि की परिक्रमा का पूर्ण लाभ नहीं मिलता है।
सावन के पहले सोमवार को रामघाट स्थित राजाधिराज मत्तगजेंद्र नाथ स्वामी मंदिर में धार्मिक कार्यक्रमों की धूम रहेगी। पूरा रामघाट भगवान भोलेनाथ के जयकारों से गुंजायमान हैं। यहां भस्म आरती के साथ शिव पूजन हुआ।
दूर दराज से दर्शन के लिए चित्रकूट आए श्रद्धालुआंे ने मंदिर की महिमा का बखान किया। सावन के पहले सोमवार के चलते मंदाकिनी के रामघाट और प्राचीन शिवमन्दिर में सुरक्षा के चौकस इंतजाम किए गए थे। सीओ सिटी के नेतृत्व में महिला थाना प्रभारी रीता सिंह और सीतापुर चौकी प्रभारी प्रवीण सिंह फोर्स के साथ मुस्तैद रहे।

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