जबड़े में फंसा कर महिला के शरीर से मांस निकाल लिया

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कैसरबाग के बंगाली टोला में मंगलवार सुबह रिटायर्ड शिक्षिका सुशीला त्रिपाठी को उनके घर में पले पिटबुल डॉग ने नोंच खाया, जिससे उनकी मौत हो गई। सुशीला त्रिपाठी परिवार के साथ कैसरबाग के बंगाली टोला में रहती थीं। वह नारी शिक्षा निकेतन में शिक्षिका के पद से रिटायर हुई थीं। उनके परिवार ने घर में एक लेब्राडोर तो दूसरा खूंखार प्रजाति का पिटबुल डॉग पाल रखा है। मंगलवार सुबह सुशीला छत पर दोनों कुत्तों को टहला रही थीं। इस दौरान अचानक से पिटबुल ने सुशीला पर हमला कर उनके पेट, सिर, चेहरा, पैर और हाथ में कई जगह नोंच लिया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। पिटबुल ने अपने खूंखार जबड़े से महिला का मांस तक नोंच के अलग कर दिया। जिस समय यह घटना हुई, उस दौरान सुशीला के घर में केवल नौकरानी ही थी। सुशीला की चीख सुनकर वह छत पर पहुंची तो उन्हें खून से लथपथ देख शोर मचाया। सूचना पर सुशीला का बेटा अमित भी आ गया। आनन-फानन उन्हें ट्रॉमा सेंटर ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमार्टम में सुशीला के चेहरे, पेट, सिर के पिछले हिस्से, दोनों हाथ और जांघ पर 13 जगह कुत्ते के नोंचने के निशान मिले। इसके अलावा कई जगह शरीर पर खरोंच के निशान भी मिले हैं। इससे जाहिर है कि सुशीला ने खुद को पिटबुल से बचाने के लिए काफी संघर्ष किया था।
खूंखार पिटबुल द्वारा अपने मालिक या घर के किसी अन्य सदस्य पर हमले का देश में यह तीसरा मामला बताया जा रहा है। लखनऊ से पहले हरियाणा के यमुनानगर में फरवरी 2022 में और राजस्थान के जयपुर में जुलाई 2021 में ऐसा केस सामने आ चुका है।
कई देशों में तो पिटबुल प्रजाति के कुत्ते पालने पर बैन है, लेकिन अपने देश में ऐसा नहीं है। पिटबुल एक बेहद आक्रामक प्रजाति का डॉग है, इसके शरीर की ताकत का आप अंदाजा नहीं लगा सकते। एक बार ये अगर हिंसक हो जाए तो इसको संभालना मुश्किल होता है। लखनउ में जिस पिटबुल ने महिला की जान ली है वो पिटबुल एक फीमेल थी। घटना की जानकारी के बाद नगर निगम की टीम मौके पर गई थी। उस समय घर पर ताला लगा था। इस कारण टीम लौट आई। कुत्ता अभी पकड़ा नहीं गया है।

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