बेहिसाब बढती भीड़ ने बढाई मुश्किलें
खराब मौसम के चलते नहीं उड़ पा रहे हेलीकॉप्टर
सभी होटल हैं फुल, नहीं मिल रहे कमरे, भोजन की भी दिक्कत
पांच सौ का कमरा पांच हजार में!
बारिश के चलते मार्गों की हालत खस्ता
मनमाफिक किराया वसूला जा रहा, लुट रही यात्रियों की जेब

 

बीती 6 मई को चारधाम यात्रा शुरू हो गई। देखते ही देखते केदारनाथ में श्रद्वालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा है। लाखों लोग यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और ये संख्या लगातार बढती ही जा रही है। इस दौरान मौसम भी यहां खराब हो रहा है, श्रद्वालुओं की बेहिसाब बढती भीड़ और मौसम की दुश्वारियों ने लोगों के सामने खासी मुसीबतें भी खड़ी कर दी हैं। केदारनाथ धाम में एबी न्यूज इंडिया की टीम भी मौजूद थी। क्या स्थिति है केदारनाथ धाम की और क्या मुसीबतें झेल रहे हैं यहां पहुंचे लोग, सबकुछ बताएंगे आपको हम इस खास रिपोर्ट में।
कोरोना काल के बाद बाबा केदारनाथ के पट खुले तो यहां दर्शन करने वालों का हुजूम उमड़ पड़ा। गौरीकुंड से हजारों की संख्या में श्रद्धालु केदारनाथ धाम की तरफ बढ़ रहे हैं। भक्त यहां से करीब 21 किलोमीटर की दूरी पैदल चल कर, घोड़े या पिट्ठू पर बैठ कर पूरी करते हैं। लेकिन मौसम बिगड़ने के बाद हुई बारिश ने यहां खासी मुश्किलें पैदा कर दी हैं। मार्ग में जबरदस्त कीचड़ हो चुका है जिस पर पैदल चलना भी खासा मुश्किल साबित हो रहा है। वहीं सवारियों को बैठा कर चलने वाले घोड़े तक फिसले जा रहे हैं। उधर क्षमता से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचने से यहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया है।
चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. फिलहाल, ये स्वास्थ्य विभाग के लिए भी सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है. ये बात खुद स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. शैलजा भट्ट ने भी स्वीकार की है. श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ना खुद में सरकार और शासन के साथ ही स्वास्थ्य विभाग के हाथ पांव फुलाने का काम रही है.
आपको बता दें कि केदारनाथ यात्रा ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. वहीं, यात्रा शुरू होने के 5वें दिन ही मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया था कि 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. उत्तरकाशी, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में यलो अलर्ट जारी करते हुए बताया गया कि ओले भी गिर सकते हैं, इसलिए यात्री मौसम के हिसाब से ही अपनी यात्रा प्लान करें.
भक्तों की भारी भीड़ ने यहां के सारे होटल फुल कर दिए हैं। आलम ये है कि पांच सौ रूपए में मिलने वाला होटल का कमरा पांच हजार रूपए तक मिल रहा है। वहीं भक्तों के लिए लगाए गए छोटे छोटे आवासीय टेंट का भी तीन हजार रूपए तक चार्ज किया जा रहा है। गौरीकुंड से केदारनाथ तक जाने का सरकारी किराया तो 2340 रूपए निर्धारित है लेकिन इसके भी पांच हजार रूपए तक वसूले जा रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत तो बुजुर्गो को हो रही है। कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए स्थिति बेहद खराब है। इतनी उंचाई पर ऑक्सीजन लेवल भी कम हो जाता है वहीं हेलीकॉप्टर के लिए भी लोगों को लम्बी लाइन लगानी पड़ रही है। खराब मौसम होने के चलते हेलीकॉप्टर भी उड़ान नहीं भर पा रहे हैं जिससे हजारों की भीड़ हैलीपैड पर अपनी बारी के इंतजार में खड़ी है। बताते चलें कि बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने करीब 67 करोड़ का बजट पारित किया था। प्रस्तावित बजट में तीर्थ यात्रियों को सुविधाओं के साथ ही बदरीनाथ व केदारनाथ धाम समेत अधीनस्थ मंदिरों की व्यवस्थाओं, विश्राम गृहों का रखरखाव, तीर्थयात्रियों को पेयजल और आवास व्यवस्था के साथ यात्रा सुविधाएं देने की बात कही गई थी।
उत्तराखंड में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदला है. मौसम विभाग के मुताबिक, केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री समेत पहाड़ी इलाकों में बारिश व आंधी तूफान के आसार है. अभी कुछ दिनों तक राज्य भर में प्री मानसून स्थितियां बनी रह सकती हैं. बद्रीनाथ से लेकर उत्तरकाशी जिले और टिहरी में मौसम बदला है. मौसम विभाग का अनुमान है कि चारों धामों समेत ऊंचे स्थानों पर आकाशीय बिजली, आंधी तूफान और मध्यम बारिश तक हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो मुश्किलें और भी बढ सकती हैं।
जहां एक ओर खराब मौसम यहां परेशानी का सबब बना है तो वहीं कहीं न कहीं उत्तराखंड सरकार की भी लापरवाही सामने आती दिख रही है। कोरोना काल के बाद चारधाम यात्रा शुरू हुई और सरकार ने एकसाथ लाखों लोगों को दर्शन के लिए रजिस्ट्रेशन देना भी शुरू कर दिया। इस दौरान आने वाली भीड़ के चलते क्या दिक्कतें सामने आ सकती हैं इसका भी बिलकुल ख्याल नहीं रखा गया। वहीं श्रद्वालुओं को भी ये सोचना चाहिए था कि बाबा केदारनाथ के पट पूरे छह महीने खुले रहते हैं ऐसे में मई जून में ही लाखों लोगों का यहां एकसाथ आना समझदारी का कदम नहीं लगता। वर्ष 2013 की प्रलय को शायद हम भूल रहे हैं। आपको बता दें कि केदारग्राम एक बेहद छोटा सा गांव है जिसकी कुल क्षमता एक बार में दस हजार लोगों की ही है। वहां अधिकतम एक रात में दस हजार लोगों के रुकने की व्यवस्था और इतने ही लोगों के भोजन की व्यवस्था हो सकती है। लेकिन 6 मई को कपाट खुलने के पहले दिन ही सुबह गौरीकुंड तक 20, 000 लोग पहुंच गए थे। इस भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासन को पसीना आ गया था जिसके बाद लोगो को गौरीकुंड में ही रोक दिया गया था। 7 मई के बाद से ही केदारग्राम की हालत ये हो गई है कि एक भी होटल, गेस्टहाउस, धर्मशाला में एक भी कमरा खाली नही है। लोग खुले आसमान के नीचे दो डिग्री तापमान में अलाव के भरोसे सो रहे हैं और खाने का भी कोई सही बंदोबस्त नहीं है। ये बात पूरी दुनिया जानती है कि पारिस्थितिक रूप से ये काफी नाजुक इलाका है। वर्ष 2013 प्रलय के वो 48 घंटे भुलाए नहीं जा सकते फिर भी सभी को मई में ही यहां पहुंचने की जिद सवार है जबकि दर्शन के लिए मंदिर के पट अभी छह महीने तक खुले रहेंगे।

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