कानपुर से दो दोस्तों के साथ गोरखपुर घूमने गये कानपुर के रियल इस्टेट कारोबारी मनीष गुप्ता की पुलिस की पिटाई से मौत हो गई। आरोप है कि जांच का विरोध करने पर गोरखपुर पुलिस कर्मियों ने उनकी बेरहमी से पिटाई की थी। उनके दोस्तों को भी पीटा था। हालत खराब होने के बाद पुलिस मनीष को लेकर एक निजी अस्पताल गई थी, जहां से उन्हें रेफर कर दिया गया था। इसके बाद पुलिस ने उन्हें मेडिकल कॉलेज एंबुलेंस से अकेले ही भेज दिया था, जहां डॉक्टरों ने मनीष को मृत घोषित कर दिया। देर रात ही पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था।

उत्तर प्रदेश पुलिस की बर्बरता कहे या हैवानियत सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ तो यूपी में अपराध को लगभग खत्म मानते हैं लेकिन जब उनकी पुलिस ही अपराधियों जैसा बर्ताव करने लग जाए तो क्या होगा आम जनता का?

क्या है पुरा मामला?

कानपुर के रहने वाले प्रापर्टी डीलर मनीष गुप्ता हरियाणा के रहने वाले अपने दोस्त हरदीप सिंह चौहान और प्रदीप सिंह चौहान के साथ गोरखपुर गए थे।गोरखपुर के सिकरीगंज के महादेवा बाजार निवासी उनके दोस्त चंदन सैनी और राणा प्रताप चंद ने उन्हें गोरखपुर घुमाने के लिए बुलाया था सोमवार की सुबह करीब साढ़े आठ बजे तीनों गोरखपुर पहुंचे और यहां रामगढ़ताल इलाके में होटल कृष्णा पैलेस के रूम नंबर 512 में ठहरे थे।

चंदन और राणा प्रताप चंद ने बताया कि सोमवार की दोपहर में हम लोग भी होटल पर पहुंचे।दिन में रामगढ़ झील की तरफ घूमे और रात में एक ढाबे पर खाना खाने के बाद दोस्तों को होटल में छोड़कर करीब साढ़े 11 बजे घर के लिए निकल गए।उधर, हरदीप सिंह चौहान ने बताया कि रात करीब 12.30 बजे रामगढ़ताल पुलिस होटल में चेकिंग करने पहुंची। इंस्पेक्टर जेएन सिंह, फलमंडी चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा के अलावा थाने की अन्य फोर्स उनके साथ में थी।

सभी लोग अपनी आईडी प्रूफ दिखाओ। तीनों में हरदीप ने खुद की और साथी प्रदीप चौहान की आईडी दिखा दी। जबकि मनीष सो रहे थे। प्रदीप ने उन्हें आईडी दिखाने के लिए नींद से जगाया। इतने पर प्रदीप वहां मौजूद पुलिस वालों से बोल बैठा, इतनी रात में यह चेकिंग किस बात की हो रही है। हम लोग क्या आतंकवादी हैं? सोते हुए इंसान को आप लोग उठाकर डिस्टर्ब कर रहे हैं। आरोप है कि इतने पर ही पुलिस वाले बौखला गए। पुलिस वालों ने शराब पी रखी थी।

आरोप यह भी है कि इंस्पेक्टर जेएन सिंह और अक्षय मिश्रा ने इतनी सी बात पर उसे पीटना शुरू कर दिया। चंदन के मुताबिक, हम दोनों को पीटते हुए कमरे से बाहर ले गए। कुछ ही देर बाद देखा कि पुलिस वाले साथी मनीष गुप्ता को घसीटते हुए बाहर लेकर आए, वह खून से लथपथ था। इसके बाद पुलिस वाले मनीष को अस्पताल ले गए। जहां उसकी मौत हो गई।

पुलिस वाले दोबारा आए थे तो सभी ने अपनी नेम प्लेट भी हटा ली थी। चंदन सैनी ने बताया कि मृतक दोस्त कानपुर का रहने वाला है। घटना की सूचना उसके परिवार को दे दी गई है। परिवार के लोग गोरखपुर पहुंच रहे हैं। मनीष अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। 5 साल पहले ही उसकी शादी हुई थी। परिवार में उसके बीमार पिता और पत्नी के अलावा उसका एक 4 साल का मासूम बेटा है। मां की कुछ दिनों पहले मृत्यु हो चुकी है।

वहीं मामले ने तूल पकड़ा तो बैकफुट पर आई योगी की बेलगाम यूपी पुलिस ने जांच के बाद थाना प्रभारी के सात 6 पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। लेकिन यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार सवालों के घेरे में आ गई है।

मां-बाप के एकलौते बेटे थे मनीष

मनीष अपने माता-पिता के एकलौते बेटे थे। मां की दो साल पहले मौत हो चुकी है। मनीष के घर में उनके पिता नंद किशोर के अलावा छोटा बेटा और पत्नी ही हैं।

 

 

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